उत्तराखंडी हो तो शेयर जरूर करे , कुछ बदलाव जरुरी हैं :
कहते हैं समय के साथ हमें बदलना पड़ता हैं , लेकिन बदलने के साथ हमें अपनी संस्कृति को भी संजोग के रखना हैं
हमारे उत्तराखंड में जो सरकार के पास रुपया बनाने के बड़े तरीके हैं वो टूरिज्म और शराब हैं , हमारी सरकार के पास जो भी पैसा आता हैं वो इन दो तरीके से ही आता हैं, और इस से ही हमारा विकास हो रहा हैं , जिसकी रफ़्तार परेशान करती हैं ,
किसी भी राज्य या देश को अपनी विकाश रफ़्तार बढ़ाने के लिए अपने इनकम रिसोर्सेज को लगातार बढ़ाना जरुरी हैं ,
आज मैं आपको अपना एक विचार बताता हूँ , जो शायद अगर हमारी सरकार इम्प्लीमेंट करे तो हम विकाश की रफ़्तार तो पकड़ ही सकते हैं साथ ही में अपनी संस्कृति को आगे बड़ा सकते हैं
अगर हमारी सरकार लॉटरी का सिस्टम सुरु करे तो हमारी सरकार के पास पैसा आएगा जिससे हमारी सरकार सिनेमा हॉल बना सकती हैं ,
हमारे सभी शहरो में अगर सिनेमा हॉल बनते हैं तो उस से फिर मनी जेनेरेट होगी और वो पैसा कही और विकास में लगाया जा सकता हैं ,
साथ ही हमारी गढ़वाली , कुमाउनी , जौनसारी , रीजनल बोलियो को एक प्लेटफॉर्म मिल जायेगा , जिससे हमारे कलाकारों के पास भी पैसा और मौका दोनों होगा , और ये एक तरह से जॉब क्रिएशन होगी |
बहुत सारे लोग इस जॉब क्रिएशन में शामिल होंगे, तब इस संस्कृति में लोगो को ज्यादा रूचि बढ़ेगी क्योंकि पैसा होगा , और सभी जानते हैं जहां पैसा मिलता हैं वह सब जाते हैं
10: ये एक छोटा बदलाव होगा पर एक बड़ी क्रांति होगी हमारी संस्कृति को बचाने के लिए ,
11: साथ ही हमें ये भी बात दिमाग में रखनी जरुरी हैं की जो भी पहाड़ो में नौकरी कर रहे हैं वो ज्यादा तर लोगो सरकारी छेत्रों में नौकरी कर रहे हैं , और उनकी इनकम टिक थक होती है , और वो मनोरंजन चाहते हैं वीकेंड्स पे , उनके पास पैसा हैं पर सुविदाओ का भारी अभाव हैं
12: हर कोई अपनी ज़िन्दगी में एन्जॉय करना चाहता हैं बच्चा हो या जवान , वो भी नयी मूवीज देखना चाहते हैं , उनके भी सपने हैं, उनके भी शौक हैं , उनका भी मन करता हैं की बड़े परदे पे मूवी देखे
CONCEPT behind This THeory : हर कोई अपनी ज़िन्दगी में अपनी किस्मत को आज़माता हैं, लोग लाटरी के टिकेट खरीदेंगे ही , चाहे गरीब हो या अमीर , बस फ़र्क़ इतना होगा की अमीर एक से ज्यादा टिकेट खरीदेगा और गरीब 1 ही टिकेट खरीदेगा , इस से ज्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ेगा बस सरकार के पास पैसा ज्यादा आएगा , अब पैसा ज्यादा होगा तो विकास भी ज्यादा होगा
निष्कर्ष :
निष्कर्ष यही हैं की अगर विकास की रफ़्तार बढ़ानी हैं तो पहले इनकम रिसोर्सेज बढ़ाने पड़ेंगे ,
आप 1 -2 रिसोर्सेज से कुछ ज्यादा नहीं कर सकते , खैर सोच से ही किसी चीज़ की शुरूआत होती हैं |
कहते हैं समय के साथ हमें बदलना पड़ता हैं , लेकिन बदलने के साथ हमें अपनी संस्कृति को भी संजोग के रखना हैं
हमारे उत्तराखंड में जो सरकार के पास रुपया बनाने के बड़े तरीके हैं वो टूरिज्म और शराब हैं , हमारी सरकार के पास जो भी पैसा आता हैं वो इन दो तरीके से ही आता हैं, और इस से ही हमारा विकास हो रहा हैं , जिसकी रफ़्तार परेशान करती हैं ,
किसी भी राज्य या देश को अपनी विकाश रफ़्तार बढ़ाने के लिए अपने इनकम रिसोर्सेज को लगातार बढ़ाना जरुरी हैं ,
आज मैं आपको अपना एक विचार बताता हूँ , जो शायद अगर हमारी सरकार इम्प्लीमेंट करे तो हम विकाश की रफ़्तार तो पकड़ ही सकते हैं साथ ही में अपनी संस्कृति को आगे बड़ा सकते हैं
अगर हमारी सरकार लॉटरी का सिस्टम सुरु करे तो हमारी सरकार के पास पैसा आएगा जिससे हमारी सरकार सिनेमा हॉल बना सकती हैं ,
हमारे सभी शहरो में अगर सिनेमा हॉल बनते हैं तो उस से फिर मनी जेनेरेट होगी और वो पैसा कही और विकास में लगाया जा सकता हैं ,
साथ ही हमारी गढ़वाली , कुमाउनी , जौनसारी , रीजनल बोलियो को एक प्लेटफॉर्म मिल जायेगा , जिससे हमारे कलाकारों के पास भी पैसा और मौका दोनों होगा , और ये एक तरह से जॉब क्रिएशन होगी |
बहुत सारे लोग इस जॉब क्रिएशन में शामिल होंगे, तब इस संस्कृति में लोगो को ज्यादा रूचि बढ़ेगी क्योंकि पैसा होगा , और सभी जानते हैं जहां पैसा मिलता हैं वह सब जाते हैं
अब कैसे होगा ये सब , ये देखते हैं हम ::
1:उत्तराखंड की जनसंख्या 1 करोड़ 11 लाख हैं , ( As per Govt Record )
2: अगर सरकार 20 रूपये में एक लाटरी टिकेट दे , और अगर कम से कम 70 लाख टिकेट बिख जाये तो,
3: सरकार के पास टोटल 20 *7000000 =14 करोड़ रूपये एक महीने में आ जायेंगे ,
4: जिससे सरकार 3 करोड़ लाटरी प्राइस में ख़तम कर देगी , और 1-2 करोड़ लाटरी सिस्टम को बनाने की प्रोसेस में ,
5: तब सरकार के पास 10 करोड़ रूपये बच जायेंगे ,
6: अगर सरकार हर महीने लाटरी टिकेट निकाले तो एक साल में 1 अरब 20 करोड़ रूपये कमा लेगी ,
7:
अब एक नार्मल सिनेमा हॉल को बनाने के लिए ज्यादा से ज्यादा 5 करोड़ रूपये
लग जायेंगे , ( In Hilly Region , cost may vary for Plane Terrain ),
8: तो टोटल हम 24 सिनेमा हॉल बना सकते हैं ,
9:
अब इन सिनेमा हॉल से हमारी सरकार को फिर से पैसा मिलेगा और हमारी संस्कृति
और कलाकारों को भी अपनी मूवीज को दिखाने के लिए एक प्लेटफॉर्म मिल जायेगा
, और हमारे अपने लोगो को भी मनोरंजन के लिए कुछ सुविधाएं मिलेंगी
10: ये एक छोटा बदलाव होगा पर एक बड़ी क्रांति होगी हमारी संस्कृति को बचाने के लिए ,
11: साथ ही हमें ये भी बात दिमाग में रखनी जरुरी हैं की जो भी पहाड़ो में नौकरी कर रहे हैं वो ज्यादा तर लोगो सरकारी छेत्रों में नौकरी कर रहे हैं , और उनकी इनकम टिक थक होती है , और वो मनोरंजन चाहते हैं वीकेंड्स पे , उनके पास पैसा हैं पर सुविदाओ का भारी अभाव हैं
12: हर कोई अपनी ज़िन्दगी में एन्जॉय करना चाहता हैं बच्चा हो या जवान , वो भी नयी मूवीज देखना चाहते हैं , उनके भी सपने हैं, उनके भी शौक हैं , उनका भी मन करता हैं की बड़े परदे पे मूवी देखे
CONCEPT behind This THeory : हर कोई अपनी ज़िन्दगी में अपनी किस्मत को आज़माता हैं, लोग लाटरी के टिकेट खरीदेंगे ही , चाहे गरीब हो या अमीर , बस फ़र्क़ इतना होगा की अमीर एक से ज्यादा टिकेट खरीदेगा और गरीब 1 ही टिकेट खरीदेगा , इस से ज्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ेगा बस सरकार के पास पैसा ज्यादा आएगा , अब पैसा ज्यादा होगा तो विकास भी ज्यादा होगा
निष्कर्ष :
निष्कर्ष यही हैं की अगर विकास की रफ़्तार बढ़ानी हैं तो पहले इनकम रिसोर्सेज बढ़ाने पड़ेंगे ,
आप 1 -2 रिसोर्सेज से कुछ ज्यादा नहीं कर सकते , खैर सोच से ही किसी चीज़ की शुरूआत होती हैं |
